कुंडली में बुरे योग जिनका निवारण है जरुरी

kundli mein bure yog jinka nivaran hai jaroori

बहुत बार ऐसा होता है की हमारी जिंदगी में एक के बाद एक समस्याएं पैदा होती जाती है, हम उन्हें सुलझाने की बहुत कोशिश करते है पर चाहते हुए भी परेशानियां कम नहीं होती है। क्या आप जानते है ऐसा क्यों होता है? अगर नहीं तो आइये हम बताते है। ये सब कुछ होता है हमारी जन्मकुंडली के दोष और योग से।  हमारी जन्मकुंडली में ग्रह मिलकर अलग-अलग योग बनाते है जिनमे से कुछ हमारे लिए बहुत फलदाई होते है तो कुछ बहुत ही बुरे परिणाम लेकर आते है।

तो आइये जानते है ऐसे कुछ दोष और योग के बारे में और जानते है उनके निवारण के उपाय:

1.चांडाल योग और दोष:

जब बृहस्पति और राहु एक साथ एक घर में होते है तब चांडाल योग बनता है। जहाँ बृहस्पति या गुरु बहुत फलदाई होता है वही राहु बने बनाये कार्यो को बिगाड़ता है और जब चांडाल योग की स्तिथि उत्पन होती है तब राहु गुरु पर भारी हो जाता है और इसी कारन से व्यक्ति के हर कार्य बिगड़ते है।

उपाय: जिस भी व्यक्ति के जीवन पर चांडाल योग का प्रभाव हो उसे भगवन शिव की आराधना करनी चाहिए।

2. केमद्रुम योग और दोष:

जब जातक की कुंडली के जिस घर में चंद्रमा विद्यमान हो और उसके आगे या पीछे वाले घर में कोई भी  ग्रह ना हो तब केमद्रुम योग बनता है। यह बहुत ही ज्यादा विनाशकारी दोष माना जाता है।  यह दोष जब भी किसी व्यक्ति की कुंडली में बनता है तब वह व्यक्ति एकदम दरिद्रता का शिकार हो जाता है।

उपाय: केमद्रुम योग के प्रभाव को खत्म या कम करने के लिए जातक को सोमवार के दिन भगवन शिव के मंदिर में जाकर शिव लिंग पर पानी तथा कच्चे दूध के मिश्रण को चढ़ाना चाहिए।

3. मंगल योग और दोष:

जब मंगल लग्न, द्वितीय भाव में (भवदीपिका नामक ग्रंथ), चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में आ जाता है तो उसे दोष माना जाता है।  मंगल योग वैवाहिक जीवन  के लिए अनिष्ठकारी होता हैं। अगर मांगलिक व्यक्ति का विवाह मांगलिक व्यक्ति से ना हो तो यह वैवाहिक जीवन में क्लेश का कारन बनता है।

उपाय: मंगल दोष का सबसे आसान उपाय है मांगलिक व्यक्ति का विवाह मांगलिक व्यक्ति से हो। अगर ऐसा नहीं हो पा रहा है या प्रेम विवाह है तो  कुम्भ विवाह या घट विवाह जैसे उपाय किये जा सकते है।

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