जानिए सूर्य यन्त्र क्यों है जरूरी और कुंडली में इसका प्रभाव

janiya surya yantra kyon hai jaruri aur kundli me iska prabhav

जैसा कि हम जानते हैं कि सूर्य किसी भी जन्म कुंडली में एक अति महत्वपूर्ण ग्रह होता है तथा किसी भी कुंडली में सूर्य के एक अथवा एक से अधिक अशुभ ग्रहों के प्रभाव में आ जाने से कुंडली में पित्र दोष का निर्माण हो जाता है जिसके चलते जातक को सूर्य की सामान्य तथा विशिष्ट विशेषताओं से संबंधित हानि हो सकती है। पित्र दोष के निवारण के लिए सूर्य यंत्र को स्थापित करना एक अच्छा उपाय है विशेषकर उस स्थिति में जब सूर्य कुंडली में अशुभ अथवा नकारात्मक रूप से काम कर रहा हो।

क्या है उपाय सुर्य के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए

सूर्य यंत्र का प्रयोग सामान्यतया किसी कुंडली में अशुभ रूप से काम कर रहे सूर्य के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए किया जाता है। सूर्य यंत्र का प्रयोग किसी कुंडली में शुभ रूप से काम कर रहे सूर्य के को अतिरिक्त बल प्रदान करने के लिए भी किया जाता है जिससे जातक को अतिरिक्त लाभ प्राप्त हो सके हालांकि किसी कुंडली में शुभ रूप से कार्य कर रहे सूर्य को अतिरिक्त बल प्रदान करने के लिए सूर्य ग्रह का रत्न माणिक्य धारण करना सूर्य यंत्र की अपेक्षा अधिक प्रभावी उपाय है। सूर्य यंत्र अपने जातक को सूर्य की सामान्य विशेषताओं से प्राप्त होने वाले लाभ प्रदान करने में सक्षम होता है जिसके चलते इस यंत्र को स्थापित करने वाले जातक को अपने कार्यक्षेत्र में कार्यरत अपने से उपरी पद के व्यक्तियों से लाभ प्राप्त हो सकता है।

जानिए कैसे करे सूर्य यन्त्र को धारण

विधिवत बनाया गया सूर्य यंत्र प्राप्त करने के पश्चात आपको इसे अपने ज्योतिषि के परामर्श के अनुसार अपने घर में पूजा के स्थान अथवा अपने बटुए अथवा अपने गले में स्थापित करना होता है। उत्तम फलों की प्राप्ति के लिए सूर्य यंत्र को रविवार वाले दिन स्थापित करना चाहिए तथा घर में स्थापित करने की स्थिति में इसे पूजा के स्थान में स्थापित करना चाहिए। इसके अतिरिक्त आप अपने सूर्य यंत्र को रविवार के दिन ही अपने ज्योतिष के परामर्श अनुसार अपने बटुए में, अथवा अपने गले में भी स्थापित कर सकते हैं। सूर्य यंत्र की स्थापना के दिन नहाने के पश्चात अपने यंत्र को सामने रखकर 11 या 21 बार सूर्य के बीज मंत्र का जाप करें तथा तत्पश्चात अपने सूर्य यंत्र पर थोड़े से गंगाजल अथवा कच्चे दूध के छींटे दें, सूर्य महाराज से इस यंत्र के माध्यम से अधिक से अधिक शुभ फल प्रदान करने की प्रार्थना करें तथा तत्पश्चात इस यंत्र को इसके लिए निश्चित किये गये स्थान पर स्थापित कर दें। आपका सूर्य यंत्र अब स्थापित हो चुका है तथा इस यंत्र से निरंतर शुभ फल प्राप्त करते रहने के लिए आपको इस यंत्र की नियमित रूप से पूजा करनी होती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *