अगर कुंडली में होता ये कारक तो होगी आपकी लव मैरिज

अगर कुंडली में होता ये कारक तो होगी आपकी लव मैरिज

प्रेम इंसान की स्वाभाविक जरुरत  है। खुशहाल जीवन जीने के लिए रिश्ते में प्यार होना बहुत जरुरी है।   जब इंसान किसी के प्रेम के प्रति झुकने लगता है तो वह उसके साथ अपने पुरे जीवन के सपने संजोने लगता है।  हर सपने को अपने प्रेमी के साथ पूरा करना चाहता है।  लेकिन हिन्दू धर्म में प्रेम विवाह करना कोई बच्चो का खेल नहीं है। क्यों की यह कई रूढ़िवादियों, धर्म, और जात-पात से भरा है।  यहां विवाह सिर्फ समान जाती में होते है लेकिन प्यार के ऐसे कोई सिद्धांत नहीं है।  यही कारण है की लड़के लड़कियों को प्रेम विवाह करने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार कुंडली के कई ऐसे कारक होते है जो प्रेम विवाह के योग को प्रभावित करते है और कई प्रेम विवाह के योग बनाते  है। आईये जानते है कुंडली में विवाह के कारक जो प्रेम विवाह को दर्शाते है।

 

जब कुंडली में मंगल का शनि यानि राहु से संबंधित या युति हो रही हो तो इस परिस्थिति में जातक के प्रेम विवाह के योग बनते है।

 

कुंडली में मंगल, शनि और राहु को  बुरा फल देने वाला माना गया है। अगर किसी जातक की कुंडली में इन तीनो ग्रहो में से कोई विवाह भाव, भावेश से संबंध बनाता है। तो व्यक्ति अपने परिवार की सहमति के बिना शादी करता है।

 

अगर कुंडली में पंचम भाव और लग्न के स्वामी एक साथ बैठे हो या एक दूसरे को देख रहे हो तो इस स्थिति में प्रेम विवाह के योग बनते है।

 

जब कुंडली में शनि किसी अशुभ भाव का स्वामी होकर वह मंगल सप्तम भाव व सप्तमेश से संबन्ध बनता है तो प्रेम विवाह के योग बनते है।

 

पंचम, सप्तम भाव के स्वामियों का आपस में युति, स्थिति अथवा दृष्टि संबंध हो या दोनों आपस में   राशि परिवर्तन हो रहा हो तब भी प्रेम विवाह के योग बनते है।

जब सप्तम भाव का स्वामी सप्तम भाव में ही स्थिति होता है तब प्रेम विवाह का भाव बनता है।

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